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देव पूजन मंगलाचरण श्लोक और हिंदी अर्थ | Mangalacharan

देव पूजन मंगलाचरण श्लोक और हिंदी अर्थ | Mangalacharan
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भारतीय सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य, देव पूजन, या अनुष्ठान को शुरू करने से पहले ‘मंगलाचरण’ (Mangalacharan) का पाठ किया जाता है। मंगलाचरण का उद्देश्य कार्य में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करना और भगवान तथा गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करना है।

इस सरल देव पूजन विधि के मंगलाचरण में पहले दो श्लोकों में ‘गुरु वंदना’ की गई है, जहाँ गुरु को ही साक्षात परब्रह्म माना गया है। इसके बाद के श्लोकों में सच्चिदानंद स्वरूप भगवान श्री कृष्ण (माधव) की स्तुति की गई है, जिनकी कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है। आइए इन पवित्र श्लोकों और उनके अर्थ को पढ़ें।

मंगलाचरण हिंदी अर्थ

श्लोक 1: गुरू ही ब्रह्मा विष्णु और शिव स्वरूप हैं। परब्रह्म परमात्मा भी वही हैं अतः: ऐसे परब्रह्मरूप गुरूदेव को प्रणाम है।

श्लोक 2: जिनके मार्गदर्शन से परब्रह्म की प्राप्ति सहज है, अर्थात् जिन गुरूदेव की कृपा से ब्रह्म प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है, ऐसे गुरू देव को नमन है।

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श्लोक 3: सत् चित् आनन्द स्वरूप व तीनों तापों (दैहिक, दैविक और भौतिक) का हरण करने वाले भगवान श्री कृष्ण को हम नमन करते हैं।

श्लोक 4: परमात्मा श्री कृष्ण को नमस्कार है, जिनके वासुदेव, हरि आदि अनन्त नाम हैं, व जो शरणागत भक्तों के क्लेशों का हरण करने वाले हैं।

श्लोक 5: जिनकी कृपा से गूंगा बोल सकता है और लंगडा चलकर पर्वतों को पार कर सकता है, ऐसे परमानन्द माधव श्री कृष्ण जी की मैं वंदना करता हूँ।

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