19 मार्च से एक असाधारण और डरावना समयचक्र शुरू हुआ है। चैत्र नवरात्रि के साथ विक्रम संवत 2083 का शंखनाद! जानिए वह अनदेखा सत्य जो आपको झकझोर देगा।
इस नववर्ष का नाम रौद्र है। ग्रहों की चाल और शास्त्रों की गणना ऐसी 7 कड़वी सच्चाइयाँ बता रही है, जिसे जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। क्या आप तैयार हैं?
खगोलीय गणना के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास लगेगा। इसे महाकाल योग मानिए। मनुष्य को अपने कर्मों का हिसाब देने के लिए अतिरिक्त समय नहीं, बल्कि अतिरिक्त परीक्षा दी जाएगी।
गुरुवार को नवरात्रि शुरू होने से देवी दोला (पालकी) पर पधारी हैं। शास्त्रों में इसे दिव्य सुरक्षा की वापसी और अनजान, पुराने रोगों के लौटने का गंभीर संकेत माना जाता है।
रौद्र संवत्सर और विनाश के अधिपति शिव का उग्र रूप! कड़वी सच्चाई है कि प्रकृति स्वयं इस वर्ष मनुष्य के प्रति शत्रुतापूर्ण हो जाएगी। ऐसी अप्रत्याशित आपदाएँ आएँगी कि आधुनिक विज्ञान देखता रह जाएगा।
राजा गुरु और मंत्री मंगल का संयोग! जमीन का नहीं, विचारों का भीषण टकराव होगा। धर्म की नई परिभाषा शक्ति तय करेगी, जिससे वैचारिक और सामाजिक संघर्ष चरम पर होंगे।
ग्रहों की चाल साफ़ इशारा कर रही है— वैश्विक आर्थिक मशीनरी बुरी तरह लड़खड़ाएगी। धन का पुनर्वितरण निवेश के माध्यम से नहीं, बल्कि उथल-पुथल और अव्यवस्था के माध्यम से होगा।
स्वास्थ्य संकट अब अपवाद नहीं, सामान्य बात होगी। पालकी की सवारी का गूढ़ रहस्य— सामाजिक रिश्तों और इंसानियत की भीषण परीक्षा! लोग अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों की बलि देने को तैयार होंगे।
महाकाल और विष्णु के प्रभाव वाला वर्ष। दिखावे की भक्ति काम नहीं आएगी। सत्ताधीशों और पाखंडी आध्यात्मिक गुरुओं को उनके कर्मों का तत्काल फल मिलेगा; आपके आंतरिक सत्य को परखा जाएगा।
इस रौद्र वर्ष में सुरक्षा केवल धर्म में है। 5 प्रभावित राशियों के अचूक उपाय और शास्त्रोक्त जानकारी के लिए अभी panditverse.com पर विस्तृत आर्टिकल पढ़ें! जय माता दी!
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