हिन्दू धर्म में दिन की शुरुआत ईश्वर, नवग्रहों, ऋषियों और महान पुण्यात्माओं के स्मरण से करने की परंपरा है। ‘प्रातः स्मरणम्’ (Pratah Smaranam) ऐसे ही पवित्र श्लोकों का एक सिद्ध संग्रह है, जिन्हें सुबह उठते ही सबसे पहले जपना चाहिए। मान्यता है कि इन श्लोकों के पाठ से दिन शुभ होता है, सभी बाधाएं दूर होती हैं और नवग्रहों की शांति होती है।
इसमें भगवान गणेश, विष्णु, शिव, देवी, सूर्य, नवग्रह, सप्तऋषि और अष्ट चिरंजीवियों का स्मरण किया जाता है। आइए ‘सरल देव पूजन विधि’ से लिए गए इन सिद्ध श्लोकों और उनके अर्थ को पढ़ें।
॥ प्रातः स्मरणम् ॥
गणेश स्मरण :-
प्रात: स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम् ।
उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्ड - माखण्डलादिसुरनायकवृन्दवन्द्यम् ॥ 1 ॥
विष्णु स्मरण :-
प्रातः स्मरामि भवभीतिमहार्तिनाशं नारायणं गरुडवाहनमब्जनाभम् ।
ग्राहाभिभूतवरवारणमुक्तिहेतुं चक्रायुधं तरुणवारिजपत्रनेत्रम् ॥ 2 ॥
शिव स्मरण :-
प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् ।
खट्वाङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥ 3 ॥
देवी स्मरण :-
प्रातः स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् ।
दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ॥ 4 ॥
सूर्य स्मरण :-
प्रातः स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यं रूपं हि मण्डलमृचोऽथ तनूर्यजूंषि ।
सामानि यस्य किरणा: प्रभवादिहेतुं ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम् ॥ 5 ॥
नवग्रह स्मरण :-
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च ।
गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम् ॥ 6 ॥
ऋषि स्मरण :-
भृगुर्वसिष्ठ: क्रतुरङ्गिराश्च मनु: पुलस्त्य: पुलहश्च गौतम: ।
रैभ्यो मरीचिश्च्यवनश्च दक्ष: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम् ॥ 7 ॥
पुण्यश्लोकों का स्मरण :-
पुण्यश्लोको नलो राजा पुण्यश्लोको जनार्दन: ।
पुण्यश्लोका च वैदेही पुण्यश्लोको युधिष्ठिर: ॥ 8 ॥
अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषण: ।
कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविन: ॥ 9 ॥
सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम् ।
जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जित: ॥ 10 ॥
प्रातः स्मरणम्: अर्थ
- गणेश स्मरण: मैं प्रातःकाल उन अनाथों के बंधु श्री गणेश जी का स्मरण करता हूँ, जिनके दोनों गालों पर सिंदूर शोभायमान है, जो बड़े-बड़े विघ्नों को नष्ट करने में प्रचंड दंड के समान हैं और देवराज इंद्र आदि देवताओं के समूह जिनकी वंदना करते हैं।
- विष्णु स्मरण: मैं प्रातःकाल संसार के भय और महान दुखों का नाश करने वाले, गरुड़ की सवारी करने वाले, कमल के समान नाभि वाले, मगरमच्छ से पकड़े गए गजराज (हाथी) को मुक्ति दिलाने वाले, चक्रधारी और खिले हुए कमल दल के समान नेत्रों वाले भगवान नारायण का स्मरण करता हूँ।
- शिव स्मरण: मैं प्रातःकाल संसार के भय को दूर करने वाले, देवताओं के स्वामी, गंगा को धारण करने वाले, वृषभ (बैल) की सवारी करने वाले, माता अंबिका के स्वामी, जिनके हाथों में खट्वांग व त्रिशूल है, जो वर तथा अभय मुद्रा धारण किए हैं, और जो संसार रूपी रोग को दूर करने के लिए अद्वितीय औषधि के समान हैं, उन भगवान शिव का स्मरण करता हूँ।
- देवी स्मरण: मैं प्रातःकाल शरद ऋतु के चंद्रमा की किरणों के समान उज्ज्वल कांति वाली, श्रेष्ठ रत्नों से जड़े मकर कुंडल और हार से सुशोभित, दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से युक्त सुंदर नीले हजारों हाथों वाली, लाल कमल के समान सुंदर चरणों वाली परमेश्वरी भगवती का स्मरण करता हूँ।
- सूर्य स्मरण: मैं प्रातःकाल भगवान सूर्य के उस श्रेष्ठ रूप का स्मरण करता हूँ, जिनका मंडल ऋग्वेद है, जिनका शरीर यजुर्वेद है और जिनकी किरणें सामवेद हैं। जो इस संसार की उत्पत्ति आदि के कारण हैं, जो ब्रह्मा और शिव स्वरूप हैं, तथा जिनका रूप अलक्ष्य और अचिंत्य है।
- नवग्रह स्मरण: ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि), शिव (त्रिपुरान्तकारी), सूर्य (भानु), चंद्रमा (शशी), मंगल (भूमिसुत), बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—ये सभी देवता और नवग्रह मेरे इस प्रातःकाल को मंगलमय (शुभ) करें।
- ऋषि स्मरण: महर्षि भृगु, वशिष्ठ, क्रतु, अंगिरा, मनु, पुलस्त्य, पुलह, गौतम, रैभ्य, मरीचि, च्यवन और दक्ष—ये सभी श्रेष्ठ ऋषि मेरे इस प्रातःकाल को मंगलमय करें।
8-10. पुण्यश्लोक व चिरंजीवी स्मरण: पुण्यश्लोक राजा नल, पुण्यश्लोक भगवान जनार्दन, पुण्यश्लोका माता सीता (वैदेही) और पुण्यश्लोक धर्मराज युधिष्ठिर का स्मरण शुभ है। अश्वत्थामा, राजा बलि, महर्षि व्यास, हनुमान जी, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम—ये सात चिरंजीवी (अमर) हैं। इन सातों के साथ आठवें महर्षि मार्कंडेय का जो व्यक्ति नित्य प्रातः स्मरण करता है, वह अकाल मृत्यु से मुक्त होकर सौ वर्ष की पूर्ण आयु प्राप्त करता है।
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