
हिन्दू विधि : धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र पर गहन चर्चा | Vedic Varta Ep. 7
क्या आपने कभी सोचा है — भारत में ‘धर्म’ सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि एक पूरी सामाजिक और न्यायिक व्यवस्था का आधार कैसे बना?
कैसे सदियों पुराने धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र आज भी हमारी सोच, क़ानून और समाज में बारीकी से बुनें हुए हैं?
Vedic Varta के इस सातवें एपिसोड में हम सिर्फ बातें नहीं बता रहे —
हम **चर्चा कर रहे हैं**, गहराई में जा रहे हैं।
🔸 धर्मसूत्र क्या थे? और क्यों वे नियमों से ज़्यादा, अनुभव और संदर्भ पर आधारित थे
🔸 मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य और नारद — इन ग्रंथों की सोच में क्या मूलभूत अंतर था
🔸 ‘धर्म’ का अर्थ हर युग में कैसे बदला, और क्यों ‘युग धर्म’ की बात होती है
🔸 राजा, समाज, न्याय और साक्ष्य का क्या था वैदिक समीकरण
🔸 और सबसे ज़रूरी सवाल — क्या प्राचीन भारत में क़ानून सच में सबके लिए बराबर था?
यह सिर्फ एक जानकारी नहीं —
यह एक **वैचारिक गहराई में उतरने वाली चर्चा** है।
अगर आप सोचते हैं, सवाल उठाते हैं, और परंपराओं को समझना चाहते हैं — सिर्फ मानना नहीं —
तो ये एपिसोड **आपके लिए है।**
🎧 आप Vedic Varta को सुन सकते हैं:
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